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HMV में उत्साह से मनाया गया नेशनल हैंडलूम दिवस

जालंधर, 10 अगस्त (धर्मेंद्र सौंधी) : हंस राज महिला महाविद्यालय के पीजी फैशन डिजाइनिंग विभाग के फैशनिस्टा क्लब द्वारा नेशनल हैंडलूम दिवस का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर छात्राओ को भारत की समृद्ध और विविध हैंडलूम विरासत के बारे में जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न राज्यों के कई पारंपरिक हैंडलूम उत्पादों को रचनात्मक तरीके से प्रदर्शित किया गया।

फैशन डिजाइनिंग विभाग की छात्राओं ने भारत के अलग-अलग पारंपरिक हैंडलूम वस्त्रों का इस्तेमाल करके ड्रेस फॉर्म पर खूबसूरती से डिजाइन किए गए वस्त्र प्रदर्शित किए। स्वदेशी वस्त्रों के प्रतीक के तौर पर एक चरखा भी दिखाया गया, जो भारत में स्वदेशो वस्त्र उत्पादन और आत्मनिर्भरता की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। फैशनिस्टा क्लब की इंचार्ज श्रीमती नवनीता ने छात्राओं को बताया कि पहला नेशनल हैंडलूम दिवस 2015 में चेन्नई में मनाया गया था।

इसका उद्देश्य भारत के बुनकरों और कारीगरों को सम्मान दना और देश की हैंडलूम विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। प्रदर्शनी के बाद सुश्री गुरसीरत कौर ने फुलकारी कढ़ाई पर एक कार्यशाला भी आयोजित की। कार्यशाला में खद्दर (खादी) के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर फैशन डिजाइनिंग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर सुश्री गुरदीप कौर भी मौजूद थीं। प्रिंसिपल डॉ. श्रीमती एकता खोसला ने प्रदर्शनी और कार्यशाला आयोजित करने में फैशनिस्टा क्लब और फैशन डिजाइनिंग विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने छात्राओं की रचनात्मकता और सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा की और कहा कि भारत की पारंपरिक वस्त्र कलाएं हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इन कलाओं को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वदेशी को बचाने और स्वदेशी हथकरघा परंपराओं का समर्थन करने के महत्व पर भी जोर दिया। इस कार्यक्रम ने छात्राओं को भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत के प्रति जागरूक किया और उन्हें आधुनिक फैशन के जरिए पारंपरिक कपड़ों को महत्व देने, उन्हें बचाने और बढ़ावा दने के लिए प्रोत्साहित किया।

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