
चंडीगढ़, 22 सितंबर (ब्यूरो) : पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए/डीआर से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बाद सरकार पर अनुपालन का दबाव बना हुआ है। 3 अगस्त 2026 के फैसले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल को कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लंबित डीए/डीआर की किस्तें केंद्रीय पैटर्न के अनुसार जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने समयसीमा को संशोधित करते हुए भुगतान के लिए दो सप्ताह का समय दिया था और मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा था।
इस मामले में कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से सरकार द्वारा अदालत के निदेशों के पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, 18 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 8 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसे दो 4-4 प्रतिशत की किस्तों में लागू किया जाना है।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, हाईकोर्ट ने पहले भी स्पष्ट किया था कि पंजाब सरकार द्वारा केंद्रीय पैटर्न अपनाने के बाद कर्मचारियों आओक दाशनरों केवल वित्तीय कठिनाइयों के आधार पर अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता। 3 अगस्त के फैसले में संबंधित अपीलों को खारिज करते हुए पहले के फैसलों को बरकरार रखा गया था।
इस मामले को लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों में लगातार चर्चा बनी हुई है। वहीं, 98 वर्षीय पेंशनर सोम दत्त के सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहने की बात भी सामने आई है, जिसे कर्मचारी-पेंशनर वर्ग अपने संघर्ष से जोड़कर देख रहा है।










