
जालंधर, 02 अक्तूबर (कबीर सौंधी) : हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि रिहायशी परिसरों में कामर्शियल गतिविधियां नहीं चल सकती, लेकिन जालंधर के आदर्श नगर में एक बिल्डिंग निर्माता ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं। यहां पर एक रिहायशी परिसर में कामर्शियल निर्माण हुआ और कई बार शिकायतें निगम के दफ्तर तक पहुंचीं लेकिन कार्रवाई नाममात्र रही।

जो सील की कार्रवाई की गई उसमें भी कई खामियां हैं। अब सवाल ये उठता है कि या तो बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने कथित रूप से सैटिंग करके रखी है या फिर बिल्डर को किसी की शह प्राप्त है। एक तरफ घर का गेट लगा है दूसरी तरफ दुकानें बन चुकी हैं।
निगम की टीम ने सील लगाई है वहीं दूसरी तरफ छोटा गेट खुला है। अब कुलमिलाकर निगम की टीम भी सवालों के घेरे में है और बिल्डर के तो क्या कहने। ऐसे आपको कई मामले मिल जाएंगे जोकि इस बात का प्रमाण हैं कि पंजाब सरकार के खजाने को सेंध लगाने वाले भी अपने हैं और सैटिंग करवाने वाले भी अपने।










