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लद्दाख में नहीं होगी Sonam Wangchuk की पदयात्रा, इस वजह से कार्यक्रम में हुआ बदलाव

दिल्ली, 20 सितंबर (ब्यूरो) : लद्दाख के संयुक्त नेतृत्व में 20 सितंबर को होने वाली विरोध रैली के कार्यक्रम में बदलाव की घोषणा कर दी है। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस और लेह एपेक्स बॉडी की ओर से केंद्र सरकार के साथ बात करने के बाद और खराब मौसम के चलते शुरुआती कार्यक्रम रद्द होने का फैसला लिया गया है। नए कार्यक्रम के अनुसार, कारगील में 23 सितंबर को शांतिपूर्ण विरोध रैली होने वाली है। इसके अलावा 24 सितंबर को भी शहीद दिवस से जुड़े हुए और कार्यक्रम होंगे। केडीए के एक अध्यक्ष ने बताया कि यह मार्च इसलिए टाला गया है क्योंकि गृह मंत्रालय ने ऑफिशियल तौर पर अक्टूबर 2026 के पहले हफ्ते में ही कारगिल में संरचनात्मक बातचीत का अगला दौर तय किया है।

सोनम वांगचुक नहीं करेंगे पदयात्रा

सरकार ने सभी नेताओं को भरोसा दिया है कि वो एक ड्राफ्ट साझा करेगी इसमें अनुच्छेद 371K जैसे प्रावधान भी शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा लद्दाख को जमीन, संसाधनों और संस्कृति पर प्रशासनिक नियंत्रण वाली विधानसभा भी मिलेगी। सोनम वांगचुक ने ऊंचे पहाड़ों और खराब मौसम के चलते रात के तापमान में गिरावट के चलते अपनी प्रस्तावित लंबी पदयात्रा की योजना छोड़ दी है।

अब लेह में होगा सांकेतिक मार्च

20 सितंबर के सड़क कार्यक्रमों की जगह अब संयुक्त नेतृत्व में कार्यक्रम को 2 बड़े यादगार कार्यक्रमों में बदल दिया गया है। 23 सितंबर को अब 20 किलोमीटर तक का सांकेतिक मार्च होगा। 24 सितंबर को एक सार्वजनिक रैली जिसमें पिछले साल की हिंसा में मारे गए लोगों की बरसी मनाई जाएगी। 23 सितंबर को सोनम वांगचुक लेह में 20 किलोमीटर के छोटे सांकेतिक मार्च का नेतृत्व करने वाले हैं। वहीं केडीए उसी समय अपनी बड़ी सार्वजनिक रैली करने वाला है।

24 सितंबर को लद्दाख में मनाया जाएगा शहीद दिवस

वहीं 24 सितंबर को पूरे लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशन में शहीद दिवस मनाया जाएगा। इसमें लेह और कारगिल दोनों उप-मंडल औपचारिक तौर पर श्रद्धांजलि देंगे। यह दिन 24 सितंबर 2025 को एक दुखद हिंसा का एक साल पूरा होने का प्रतीक है। इसमें पुलिस फायरिंग के दौरान 4 युवा प्रदर्शनकारियों की जान चली गई थी।

नेताओं ने बताया कि इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करवाना, भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होना और पिछले साल के पीड़ितों के लिए न्यायिक जवाबदेही और उचित मुआवजा मांगना है।

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