
चंडीगढ़ 23 मई (ब्यूरो) : प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जालंधर यूनिट ने पंजाब के चर्चित सनटेक सिटी (Suntec City) भूमि घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अजय सहगल (Ajay Sehgal) को गिरफ्तार कर लिया है। अजय सहगल ‘इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी’ (ICHBS) के सचिव और इस परियोजना के मुख्य प्रमोटर हैं।
यह पूरा मामला लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित भूमि घोटाले, फर्जी दस्तावेजों और चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) की मंजूरी में हेराफेरी से जुड़ा हुआ है।
📌 मामले की मुख्य बातें (Key Highlights)
फर्जी सहमति पत्र (Fake Consent Letters): जांच के अनुसार, अजय सहगल ने 15 विभिन्न भूस्वामियों (किसानों) की लगभग 30.5 एकड़ जमीन के फर्जी सहमति पत्र तैयार किए थे। इन पत्रों पर किसानों के नकली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए थे।
CLU की धोखाधड़ी: इन्हीं जाली सहमति पत्रों का उपयोग करके ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) की मंजूरी हासिल की गई।
गैर-कानूनी निर्माण और बिक्री: जाली CLU के आधार पर न केवल सनटेक सिटी टाउनशिप विकसित की गई, बल्कि ‘ला कैनेला’ (La Canela) आवासीय बहुमंजिला परिसर और ‘डिस्ट्रिक्ट 7’ (District 7) व्यावसायिक परिसर भी बनाए गए। रेरा (RERA) से बिना पंजीकरण और मंजूरी के इन प्रोजेक्ट्स में 200 करोड़ रुपये से अधिक के फ्लैट व प्लॉट बेचे गए।
काले धन को छुपाने की कोशिश (हवा में उड़ते नोट): इस मामले में हुई छापेमारी के दौरान एक अजीब वाकया सामने आया था। जब ईडी की टीम ने आरोपियों के ठिकानों पर छापा मारा, तो एक व्यवसायी (नितिन गोयल) के फ्लैट की बालकनी से करीब 21 लाख रुपये कैश नीचे फेंक दिया गया था, जिसे बाद में ईडी अधिकारियों ने सड़क से बरामद किया।
🔍 कैसे शुरू हुई जांच?
यह मामला मूल रूप से नवंबर 2022 में पंजाब पुलिस द्वारा मुल्लांपुर (मोहाली) में दर्ज की गई एक एफआईआर (FIR) से शुरू हुआ था। कई किसानों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी कीमती जमीनों को हड़पने और सनटेक सिटी टाउनशिप के लिए सरकारी मंजूरी प्राप्त करने के लिए उनके फर्जी हस्ताक्षर और सहमति पत्र बनाए गए हैं।
पंजाब पुलिस की इस एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत अपनी जांच शुरू की, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी का खुलासा हुआ।
💼 राजनीतिक और प्रशासनिक सांठगांठ की जांच
ईडी की जांच केवल बिल्डरों तक ही सीमित नहीं है:
GMADA और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी रडार पर: आरोप है कि सरकारी अधिकारियों ने बिना दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के ही धड़ाधड़ मंजूरियां दे दीं। इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है और उनके शामिल होने पर जल्द ही और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के साथ धोखा: नियमों के अनुसार, परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित जमीन को GMADA को सौंपा जाना था, लेकिन अजय सहगल ने ऐसा नहीं किया और उस पर भी नियमों का उल्लंघन किया।
💰 बरामदगी और छापे
मई 2026 की शुरुआत में ईडी ने मोहाली और चंडीगढ़ में करीब एक दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की थी।
इस दौरान करीब 1 करोड़ रुपये की नकदी और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े से अर्जित की गई रकम “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध की कमाई) के अंतर्गत आती है, जिसे छुपाने के लिए कई फर्जी शेल कंपनियों और बिचौलियों का सहारा लिया गया था।
यह रिपोर्ट मीडिया सूत्रों और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी की गई जानकारियों पर आधारित है।














