
जालंधर, 17 अप्रैल (कबीर सौंधी) : शहर के रतन अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों का दावा है कि उनकी माता की हालत बिल्कुल ठीक थी और वह खाना मांग रही थीं, लेकिन जैसे ही इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड का जिक्र किया गया, अस्पताल ने चंद मिनटों में ही उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मरीज की हालत को पहले से ही बेहद चिंताजनक बताया है।
मरीज गुरदेव कौर के बेटे हरकेश कुमार और अन्य परिजनों ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी माता सामान्य रूप से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने अपनी बेटी से रोटी खाने की इच्छा भी जताई थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन शुरुआत से ही लगातार पैसों की मांग कर रहा था। इसी बीच जब उन्होंने पंजाब सरकार की मुफ्त इलाज योजना ‘आयुष्मान कार्ड’ के जरिए इलाज करने को कहा और किसी से अस्पताल में फोन करवाया, तो प्रशासन ने महज 10 से 15 मिनट के भीतर ही ठीक-ठाक मरीज को वेंटिलेटर पर डाल दिया। परिवार का सीधा आरोप है कि केवल पैसे वसूलने या कार्ड के झंझट से बचने के लिए जानबूझकर मरीज की स्थिति को गंभीर दिखाया गया है। मरीज के साथ मौजूद अमरीक सिंह ने भी रोष जताते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन का ध्यान केवल पैसों पर है। अब तक सिर्फ एक बोतल चढ़ाई गई है, लेकिन रुपयों की मांग बार-बार की जा रही है।
अस्पताल का पलटवार- 15 अस्पतालों से जवाब मिलने के बाद यहां आए थे परिजन
दूसरी ओर, रतन अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) नरिंदर कुमार ने अस्पताल का पक्ष रखते हुए परिजनों के सभी दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया। पीआरओ ने स्पष्ट किया कि मरीज कल शाम को ही उनके पास आई थीं और यह परिवार पहले ही जालंधर के 15-20 अस्पतालों के चक्कर काट चुका था, जहां से उन्हें जवाब मिल गया था। उन्होंने बताया कि मरीज के दिल के टेस्ट (NT-proBNP) की रिपोर्ट में लेवल 35,000 आया है, जो सामान्य तौर पर 300 के आसपास होना चाहिए। पीआरओ के मुताबिक, 72 वर्षीय मरीज को ‘कार्डियक अरेस्ट’ (दिल का दौरा) हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज की यह नाजुक हालत प्राकृतिक है और पैसे के लिए मरीज को गंभीर करने के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।













