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लकी ओबेरॉय कत्ल मामले में आया नया मोड़, दलबीर ने कहा – मेरा इस कत्ल से कोई लेना-देना नहीं, शशि शर्मा पर लगाया आरोप

जालंधर, 13 फरवरी (कबीर सौंधी) : जालंधर में आम आदमी पार्टी के युवा नेता लकी ओबेरॉय की हत्या के मामले में एक नया और अहम मोड़ आया है। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में नामजद किए गए दलबीर सिंह दलबीरा ने मीडिया के सामने आकर अपनी सफाई पेश की है। दलबीरा ने इस हत्याकांड में अपना हाथ होने से साफ इनकार करते हुए कहा कि उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। उसने दावा किया कि न तो उसकी कभी लकी ओबेरॉय से बात हुई और न ही कोई निजी दुश्मनी थी।

शशि शर्मा पर लगाए साजिश रचने के गंभीर आरोप

दलबीरा ने इस पूरे मामले की जड़ लकी के दोस्त और अपने पुराने दुश्मन शशि शर्मा उर्फ ‘बुद्धी’ को बताया है। उसने आरोप लगाया कि शशि शर्मा के साथ उसका पुराना विवाद चल रहा था और उसी रंजिश का बदला लेने के लिए शशि ने इस हत्याकांड का इस्तेमाल किया। दलबीरा का कहना है कि शशि शर्मा ने ही लकी के भाई और परिवार को गुमराह किया और एफआईआर में जानबूझकर उसका (दलबीरा का) नाम लिखवाया। उसने स्पष्ट किया कि पुलिस और परिवार जिन फोन कॉल्स और धमकियों की बात कर रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं क्योंकि उसका लकी से कभी कोई संपर्क या आमना-सामना ही नहीं हुआ।

‘प्रधानी’ की भूख ने ली लकी की जान

मीडिया से बात करते हुए दलबीरा ने राजनीति और कॉलेजों में चल रहे ‘प्रधानी’ कल्चर पर भी तीखा हमला बोला। उसने कहा कि वर्चस्व और प्रधानी की यह भूख ही युवाओं की जिंदगी बर्बाद कर रही है। उसने खुलासा किया कि लकी, जोगा और शशि शर्मा पहले एक ही ग्रुप में थे, लेकिन प्रधानी को लेकर इनके बीच आपसी विवाद शुरू हो गया था। दलबीरा ने दावा किया कि उसने सोशल मीडिया पर इनके आपसी झगड़े और धमकियों के वीडियो देखे थे, लेकिन उसका निजी तौर पर इन गुटों या उनके विवादों से कोई लेना-देना नहीं था।

दो साल पहले छोड़ चुका हूं अपराध की दुनिया – दलबीरा

दलबीरा ने अपनी बेगुनाही का सबूत देते हुए कहा कि वह पिछले दो साल से अपराध की दुनिया को अलविदा कह चुका है और एक शांतिपूर्ण जीवन जी रहा है। उसने दुख जताया कि बिना किसी ठोस सबूत के उसे गैंगस्टर घोषित कर दिया गया। उसने पुलिस की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन को भी सौ फीसदी पता है कि एफआईआर में उसका नाम गलत तरीके से शामिल किया गया है। उसका मानना है कि पुलिस सच्चाई जानती है, शायद इसीलिए उसके प्रति नरम व्यवहार अपनाया जा रहा है।

अंत में दलबीरा ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि धारा 302 जैसे गंभीर मामले में किसी का नाम बिना जांच के डालना अन्याय है। उसने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए ताकि सच सामने आ सके और उसे इस झूठे केस से राहत मिल सके। उसका कहना है कि सोशल मीडिया पर वीडियो डालने वाले या बाहर बैठकर धमकियां देने वाले असली गुनहगारों की वजह से निर्दोष लोगों को नहीं भुगतना चाहिए।

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