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एच.एम.वी. में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन

जालंधर 13 अप्रैल (धर्मेन्द्र सौंधी) : हंस राज महिला महाविद्यालय, जालंधर में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की 135 वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राजनीति विज्ञान फोरम द्वारा प्राचार्या डॉ. (श्रीमती) एकता खोसला के कुशल मार्गदर्शन में एक लघु डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन तथा उसके बाद पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। डॉक्यूमेंट्री में डॉ. अम्बेडकर के जीवन के महत्वपूर्ण चरणों को दर्शाया गया, जिसमें उनका बचपन, व्यावसायिक संघर्ष, राजनीतिक यात्रा, विशेष रूप से गांधी बनाम अम्बेडकर विमर्श, तथा भारतीय संविधान के शिल्पकार के रूप में उनकी महान भूमिका को उजागर किया गया। विभिन्न विभागों एवं कक्षाओं के विद्यार्थियों ने पैनल चर्चा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर चर्चा के प्रमुख विषय ‘डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जीवन एवं योगदान’ तथा ‘परिवर्तन के शिल्पकार डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि’ रहे। पैनलिस्ट पलक (बी.ए. सेम VI), विश्व कीर्ति (बी.ए. सेम VI), सिमरनजीत कौर (बी.ए. सेम IV) एवं तन्वी (बी.ए. सेम II) ने डॉ. अम्बेडकर के जीवन, योगदान एवं उनके दूरदर्शी सामाजिक-राजनीतिक विचारों पर प्रभावशाली ढंग से अपने विचार व्यक्त किए।

विद्यार्थियों ने आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका, सामाजिक न्याय के लिए उनके निरंतर संघर्ष, शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा समानता एवं समावेशी लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के उनके संकल्प को विशेष रूप से रेखांकित किया। राजनीति विज्ञान विभाग को अध्यक्ष श्रीमती अल्का शर्मा एवं इतिहास विभाग की अध्यक्ष श्रीमती प्रोतिमा ने पैनल समीक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाई और विद्यार्थियों की विचारशील भागीदारी एवं विश्लेषणात्मक प्रस्तुति की सराहना की। प्राचार्या डॉ. एकता खोसला ने विद्यार्थियों एवं विभाग को इस सार्थक एवं ज्ञानवर्धक आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने वर्तमान समाज में डॉ. अम्बेडकर के विचारों की प्रासंगिकता पर बल देते हुए विद्यार्थियों को उनके समानता, शिक्षा एवं सामाजिक सुधार के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में पैनलिस्टों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक एवं फोरम की इंचार्ज डॉ. जीवन देवी ने भी प्रतिभागियों को उनके सराहनीय प्रयासों के लिए बधाई दी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जो भारत के महान राष्ट्रनिर्माताओं में से एक को समर्पित एक गरिमामय और स्मरणीय श्रद्धांजलि रहा।

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