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एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, जालंधर में मल्टीमीडिया विभाग द्वारा “अभिव्यक्तिः माइक ऑन फियर ऑफ” का भव्य आयोजन

जालंधर, 09 अक्तूबर (धर्मेंद्र सौंधी) : एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, जालंधर के पी.जी. डिपार्टमेंट ऑफ़ मल्टीमीडिया द्वारा “अभिव्यक्तिः माइक ऑनःफियर ऑफ” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता को व्यक्त करने, मंच के डर पर काबू पाने और अपनी कलात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए एक जीवंत मंच प्रदान करना था।

कार्यक्रम में कहानी सुनाना, स्टैंड-अप कॉमेडी, कविता, गायन और वाद्य संगीत, मिमिक्री और जादू के करतबों सहित विविध प्रकार की प्रस्तुतियाँ देखने को मिलीं। कुल 26 प्रविष्टियों के साथ, इस आयोजन में उत्साहित करने वाली भागीदारी देखी गई और विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता एवं बहुआयामी प्रतिभा की झलक मिली। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों को सृजनात्मक डिजिटल सामग्री के माध्यम से कैद करने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु रील मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

प्राचार्या डॉ. नीरजा ढींगरा ने विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण प्रतिभागिता, रचनात्मकता और आत्मविश्वास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम निरंतर होने चाहिए ताकि विद्यार्थी अपने अंदर की प्रतिभा को तराश सके। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन एक प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल द्वारा किया गया, जिसमें डांस विभाग से डॉ रंजना, संगीत विभाग से डॉ सीमा शर्मा, पंजाबी विभाग से श्री डॉ रमन दादरा, थिएटर विभाग से श्री अमनदीप सिंह शामिल हुए। प्रतियोगिता में ध्रुवप्रीत सिंह (बीबीए सेमेस्टर III) ने मिमिक्री के लिए प्रथम पुरस्कार हासिल किया जबकि आरव (बी. बोक. साउंड टेक्नोलॉजी, सेमेस्टर ।) ने गायन के लिए द्वितीय पुरस्कार, लविश अरोड़ा (बी. कॉम. सेमेस्टर ।) ने कविता के लिए तृतीय पुरस्कार तथा सांत्वना पुरस्कार जादू के करतब के लिए सुश्री अमनदीप कौर और कविता के लिए साहिल चावला (एम.बोक. ई-कॉमर्स, सेमेस्टर ।) को प्रदान किए गए।

रील मेकिंग प्रतियोगिता में, श्री करण सोंधी (बी. डिजाइन मल्टीमीडिया, सेमेस्टर III) ने कार्यक्रम के मूल भाव को रचनात्मक रूप से रील में कैद करने के लिए पुरस्कार जीता। डॉ डींगरा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पी.जी. डिपार्टमेंट ऑफ़ मल्टीमीडिया के श्री अंकित गोयल, सुश्री सोनाली बेरी के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को तलाशने, मंच के डर पर काबू पाने और अपनी कलात्मक व सम्प्रेषण कला को विकसित करने का मंच प्रदान किया।

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