
अमृतसर, 18 जून (साहिल गुप्ता) : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को गुरु धोकी (विश्वासघाती) और खालसा पंथ विरोधी घोषित करने के बाद अकाल तख्त के जत्थेदारों ने सभी दलों के साथ विधायकों व मंत्रिमंडल को 29 जून को अकाल तख्त के सामने हाजिर रहने का फरमान जारी किया है। मुख्यमंत्री मान को एक वीडियो की वजह से अकाल तख्त ने उन्हें सजा सुनाई है। मान का यह दावा ठुकरा दिया गया कि यह वीडियो एआई से बनाया गया है।
पंजाब में राजनेताओं को अकाल तख्त का हुक्म मानना ही पड़ता है। इससे पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह, पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री बूटासिंह, अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल, पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीतसिंह बरनाला को पंथ का अनादर करने के आरोप में अकाल तख्त ने सजा सुनाई थी। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष मार्च तक है, लेकिन वहां इस वर्ष के अंत तक चुनाव कराए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि इसे देखते हुए मान को फंसाया जा रहा है। इसके पीछे अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल का हाथ है।
पिछले दिनों हुए स्थानीय निकाय चुनाव में भगवंत मान के नेतृत्व में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आप’ को भारी सफलता मिली। कहा तो यह भी जा रहा है कि पंजाब का राजनीतिक वातावरण ‘आप’ के अनुकूल है, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। बीजेपी पहले ही आम आदमी पार्टी के 6 सांसद फोड़ चुकी है। पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी 5 वें स्थान पर रही है। बीजेपी अकाली दल के सहयोग से पंजाब विधानसभा चुनाव जीतने का लक्ष्य रखती है।
अकाल तख्त का निर्णय निश्चित रूप से पंजाब की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बनेगा, लेकिन केवल इसी मुद्दे के आधार पर चुनावी परिणाम तय होंगे, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। चुनाव के समय सरकार का प्रदर्शन, विपक्ष की एकजुटता, किसानों, युवाओं और शहरी मतदाताओं के मुद्दे तथा दलों के गठबंधन कहीं अधिक निर्णायक कारक साबित हो सकते हैं। इसलिए यह कहना उचित होगा कि यह घटना राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव आने वाले महीनों में जनता की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।









