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पार्क एंक्लेव में बन रहीं दुकानों पर निगम ने नोटिस लगवाया, पहले भी निगम की टीम ध्वस्त कर चुकी दुकानें

नेता और पत्रकार की यारी में बन रहीं थी दुकानें : सूत्र

जालंधर, 05 नवंबर (धर्मेन्द्र सौंधी) : शहर में कानून का राज चलता है या रसूखदारों का, यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। पार्क एंक्लेव में बॉम्बे एवेन्यू के सामने जिस अवैध दुकान निर्माण को नगर निगम की टीम कुछ समय पहले ध्वस्त कर चुकी थी, वह निर्माण अब दोबारा लगभग पूरा हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि इस बार निगम की टीम ने बुलडोजर चलाने की जगह सिर्फ एक नोटिस चिपकाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह अवैध निर्माण वेस्ट के एक कद्दावर नेता और मीडिया जगत से जुड़े कुछ कथित पत्रकारों की ‘यारी’ की छत्रछाया में हो रहा है। आरोप है कि जो लोग खुद को अवैध निर्माणों के खिलाफ आवाज उठाने का मसीहा बताते हैं, उन्हीं के संरक्षण में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हालांकि, हम इस कथित मिलीभगत की आधिकारिक पुष्टि नहीं करते। त्योहारी सीजन की छुट्टियों का फायदा उठाकर इन दो दुकानों को दोबारा तेजी से खड़ा किया गया और अब शटर लगने के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा था।

अवैध निर्माण पर निगम की कारवाई

एक स्थानीय दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी हताशा व्यक्त करते हुए कहा, “सबकी आंखों के सामने यह तमाशा हो रहा है। पहले तोड़फोड़ हुई, फिर सब शांत हो गए और अब दुकानें फिर से बन गईं। यह नोटिस तो सिर्फ दिखावा है। अगर निगम सच में कार्रवाई करना चाहता तो बुलडोजर लाता, कागज का टुकड़ा नहीं चिपकाता। लगता है यहां आम आदमी के लिए कानून और है और पहुंच वालों के लिए और।

निगम की कारवाई के बाद फिर से मुकम्मल हुआ अवैध निर्माण, चिपकाया नोटिस

जालंधर की जनता का निगम कमिश्नर से सीधा सवाल !

एक बार ध्वस्त होने के बावजूद उसी स्थान पर दोबारा निर्माण होना न केवल बिल्डर के बुलंद हौसलों को दिखाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि निगम के दफ्तर तक किसकी पहुंच काम कर रही है। कमिश्नर साहब, क्या यह शहर की जनता के साथ धोखा नहीं है? क्या आपकी निगरानी में यह अवैध निर्माण दोबारा तोड़ा जाएगा, या यह नोटिस भी रसूखदारों के दबाव में एक ठंडे बस्ते में डाल दी गई फाइल बनकर रह जाएगा? शहर की जनता अब आपसे जवाब और तत्काल कार्रवाई का इंतजार कर रही है। इस पूरे मामले में नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिसकी नाक के नीचे यह अवैध निर्माण दोबारा फल-फूल गया।

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