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जज ने डोनाल्ड ट्रंप के बर्थराइट सिटीजनशिप आदेश को रोका, भारतीयों के लिए इसका क्या मतलब है ?

अमेरिका, 24 जनवरी (ब्यूरो) : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने गुरुवार (23 जनवरी) काे डोनाल्ड ट्रंप के बर्थराइट सिटिजनशिप खत्म करने के आदेश पर रोक लगा दी। हैरानी की बात है कि एक डिस्ट्रिक्ट जज ने प्रेसिडेंट ट्रंप के आदेश पर रोक लगा दी। अमेरिका के सिएटल स्थित यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज जॉन कॉफनर ने यह रोक लगाई है। कोर्ट ने ट्रंप के ऑर्डर को अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के खिलाफ माना गया। ट्रंप के इस ऑर्डर से लाखों लोगों की नागरिकता पर खतरा मंडरा रहा था।

डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ लेने के साथ ही बर्थराइट सिटिजनशिप (Birthright Citizenship) खत्म करने का आदेश दिया था। इस आदेश के मुताबिक, 19 फरवरी के बाद अमेरिका में ऐसे बच्चों को नागरिकता नहीं देने का प्रावधान था, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी नहीं हैं। इस आदेश से न केवल नागरिकता खत्म हो जाती बल्कि इन बच्चों को सरकारी सेवाओं का भी लाभ नहीं मिलता। कोर्ट के फैसले ने फिलहाल इन सभी बच्चों को राहत मिली है जो ट्रंप के आदेश से प्रभावित हो सकते थे।

डेमोक्रेट्स और सिविल राइट्स ग्रुप्स ने की कोर्ट में चुनौती

ट्रंप के फैसले के खिलाफ डेमोक्रेट्स की अगुवाई वाले चार राज्यों, वाशिंगटन, एरिजोना, इलिनोइस और ओरेगन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सिविल राइट्स ग्रुप्स ने भी इस फैसले को चुनौती दी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज जॉन कॉफनर ने आदेश पर गंभीर सवाल उठाए। जज जॉन कॉफनर ने कहा, यह आदेश स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है और इसे लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप का ऑर्डर असंवैधानिक है। इस पर अस्थायी रूप से रोक लगाई जाती है। जज कॉफनर ने कहा कि यह आदेश संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है, जिसमें हर व्यक्ति को जन्म के आधार पर नागरिकता का अधिकार दिया गया है।

संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन  

अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन कहता है कि अमेरिका में जन्मा हर व्यक्ति अमेरिका का नागरिक है। ट्रंप के आदेश ने इस प्रावधान को चुनौती दी थी। अदालत ने इसे ‘जमीन के अधिकार’ (Right of the Soil) के खिलाफ बताते हुए कड़ी फटकार लगाई। जज ने कहा कि ट्रंप का आदेश संविधान की मूल भावना से मेल नहीं खाता।

ट्रंप ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स ने इसे संविधान की जीत बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप का आदेश लाखों नवजात बच्चों की जिंदगी को मुश्किलों में डाल देता। कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को बड़ा झटका लगा है। हालांकि, ट्रंप ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह आदेश संविधान के 14वें संशोधन की सही व्याख्या करता है। DoJ ने कहा कि वे इस आदेश का जोरदार बचाव करेंगे और इसे लागू कराने की हरसंभव कोशिश करेंगे।

बर्थराइट सिटिजनशिप (Birthright Citizenship) अमेरिका समेत 30 देशों में लागू है। यह ‘जस सोलि’ (Jus Soli) यानी ‘जमीन का अधिकार’ के सिद्धांत पर आधारित है। अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन हर व्यक्ति को जन्म के आधार पर नागरिकता का अधिकार देता है। इसे 1868 में अमेरिका में गुलामी खत्म होने के बाद लागू किया गया था। इसका मकसद गुलामों और उनके वंशजों को नागरिकता प्रदान करना था। ट्रंप के आदेश ने इस संशोधन की मूल भावना को चुनौती दी थी। अगर ट्रंप का आदेश लागू होता, तो हर साल 1,50,000 से ज्यादा बच्चों की नागरिकता खत्म हो जाती।

लाखों लोगों को राहत, ट्रंप की नीति पर सवाल

कोर्ट के फैसले से लाखों लोगों को राहत मिली है। यह फैसला केवल कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों की रक्षा का भी प्रतीक है। ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी को पहले भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप इस मामले को किस हद तक सुप्रीम कोर्ट में ले जाते हैं। फिलहाल ट्रंप के आदेश पर राेक के कोर्ट के फैसले को मानवाधिकारों की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। डेमोक्रेट्स और सिविल राइट्स समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया है। कहा है कि यह संविधान और कानून की जीत है। यह सुनिश्चित हुआ है कि संविधान के अधिकार सुरक्षित हैं। संविधान पर किसी विवादित आदेश का असर नहीं होगा।

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