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योग से योगा, योगा से योग नहीं : MAAsterG

दिल्ली,18 जून (ब्यूरो) : आज अंतरराष्ट्रीय योगा डे है, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस। पूरा संसार आज इसे मनाएगा। पिछले कई सालों से योगा डे की धूम मची हुई है। जब से यूनाइटेड नेशन ने योगा डे घोषित किया है, तब से पूरी दुनिया में योगा की धूम हो गई है। पर क्यों? योगा है क्या? योगा तुम्हारे शरीर से जुड़ा हुआ है, तुम्हारी गाड़ी की ओवरहॉलिंग यानी शरीर की मरम्मत। कहते हैं ना, “गाड़ी खराब हो गई है, इसकी सर्विस करवानी है।“ वैसे ही यह शरीर भी एक गाड़ी की तरह है, जो खराब होता रहता है और यही कारण है कि हॉस्पिटलों में भीड़ बढ़ती जा रही है। आज से चालीस साल पहले इतने हॉस्पिटल नहीं होते थे।

इस शरीर की बीमारियों को खत्म करने के लिए आज सब को योगा सिखाया जा रहा है। जब योगा शब्द आता है, तो हम ऋषि-मुनियों से जुड़ जाते हैं। ऋषि-मुनि पतंजलि वे महर्षि हैं, जिन्होंने योगा संसार को दिया। योगा शब्द शरीर से संबंधित है, जैसे प्राणायाम या योगाभ्यास हैं। पर क्या सिर्फ शरीर से योगा करना काफी है? योगा शरीर को स्वस्थ करेगा, परंतु सिर्फ तीस से चालीस प्रतिशत। मुख्य तो योग है। योग से योगा आया, योगा से योग नहीं आया। पतंजलि गुफा में योग के लिए गए थे। यह कौन सा, किसका योग था? अंदर की वो बैट्री, वो ऊर्जा, वो चेतना, वो आत्मा जिससे यह शरीर चलता है, वह आत्मा की ऊर्जा परमात्मा से आती है। इसलिए परमात्मा से योग आवश्यक है। जब परमात्मा से योग हो जाता है, तो शरीर की ऊर्जा चारों दिशाओं में फैल जाती है और जहाँ भी बीमारी खड़ी हो, उसे ठीक करना शुरू कर देती है। पर ये ऊर्जा वहाँ तक इसलिए नहीं पहुँच पाती, क्योंकि हम उस परमात्मा से दूर हो गए हैं।

योग का अर्थ है, आत्मा का परमात्मा से मिलन। अगर हम परमात्मा को आगे नहीं रखेंगे तो ये सिर्फ शारीरिक व्यायाम बनकर रह जाएगा। आज मानसिक बीमारियाँ कितनी बढ़ गई हैं, जैसे डिप्रेशन। मानसिक ऊर्जा पूरे शरीर को ठीक करती है, पर हम अपनी सारी ऊर्जा फालतू विचारों में खर्च कर देते हैं। मोबाइल और कंप्यूटर का इसमें बहुत बड़ा योगदान है। हमने निर्जीव उपकरण को जिंदगी मान लिया है, जबकि जिंदगी हमारा जिंदा शरीर है, जिसमें चेतना है।

मुर्दे उपकरणों की ऊर्जा क्रत्रिम है, इसलिए तुम्हारा दिमाग थक गया है। शरीर चाहे जितना योगाभ्यास कर ले, स्वस्थ नहीं हो सकता। शरीर स्वस्थ तभी होगा, जब योग होगा। पतंजलि योग के लिए गए थे, योगा के लिए नहीं। योग से योगा आया। हम उस पिता को न भूलें जो इस शरीर को चला रहा है। अगर आत्मा नहीं हो, तो शरीर गिर जाएगा।

आज अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस पर सबसे पहले योग पर ध्यान देना जरूरी है। जड़ को पानी नहीं दिया और पत्तों को देते रहोगे, तो पौधा सूख जाएगा। पहले जड़ को पानी देना है। आज संकल्प लें कि अगर योग होगा तो योगा अपने आप होगा। पहले मानसिक शांति लाओ। विचारों पर ब्रेक लगाओ। उतना देखो, उतना सुनो, उतना बोलो जितनी जरूरत हो। अंदर की ऊर्जा कीमती है।

जब आत्मा निकलती है, तो शरीर की कीमत शून्य हो जाती है। दुनिया की सारी दौलत देकर भी कोई मृत शरीर को जीवित नहीं कर सकता। तो बड़ा कौन है—शरीर या आत्मा? आत्मा अमूल्य है। जैसे मोबाइल की बैटरी चार्ज करते हो, वैसे ही आत्मा को परमात्मा से जोड़कर चार्ज करना है। जब यह कनेक्शन जुड़ता है, तो शरीर अपने आप ठीक होने लगता है।

आज अंतरराष्ट्रीय योगा डे पर आत्मा पर ध्यान लगाओ। शरीर का ज्ञान इंटरनेट पर भरा पड़ा है, पर अगर आत्मा का योग नहीं किया, तो दिमाग का इलाज नहीं हो पाएगा। योग को महत्व देंगे, तो योगा अपने आप होगा। शरीर के लिए योगा जरूरी है, पर योग के बिना योगा अधूरा है। योग के बिना योगा की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। आत्मा का परमात्मा से योग करो और फिर योगा का आनंद लो, तभी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस सफल होगा।

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