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मोदी जी के दौरे में जालंधर देहाती भाजपा पूरी तरह आउट

बड़े नेताओं की “फोटो पॉलिटिक्स” उजागर, छोटे कार्यकर्ता फिर ठगे गए

जालंधर (धर्मेन्द्र सौंधी) : सतगुरु रविदास महाराज जी के पावन प्रगटोत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का जालंधर (रायपुर बल्लां) आगमन आस्था और सम्मान का विषय रहा। लेकिन इसी ऐतिहासिक दौरे ने भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की अंदरूनी सच्चाई भी सामने ला दी।

पार्टी प्रोटोकॉल के अनुसार प्रधानमंत्री या किसी भी बड़े नेता के दौरे के समय राज्य प्रधान, जिला प्रधान और संबंधित मंडल अध्यक्ष की मौजूदगी अनिवार्य मानी जाती है। इसके बावजूद जालंधर देहाती भाजपा की पूरी टीम को इस कार्यक्रम से पूरी तरह किनारे कर दिया गया।

न कोई सूचना, न कोई फोन कॉल, न ही किसी प्रकार का आधिकारिक निमंत्रण—मानो जालंधर देहाती भाजपा का कोई अस्तित्व ही न हो।

दूसरी ओर, शहर के कुछ “VIP नेता” पहले से ही अपने-अपने फ्लेक्स बोर्ड लगवाकर कैमरों के सामने पोज़ देते नज़र आए। कार्यक्रम श्रद्धा और सामाजिक समरसता का था, लेकिन कुछ नेताओं ने इसे अपनी निजी प्रचार रैली में तब्दील कर दिया।

मेहनत करने वाला कार्यकर्ता पीछे रह गया और पद व रसूख़ वाले नेता आगे दिखाई दिए—यही आज की संगठनात्मक हकीकत बन चुकी है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जालंधर देहाती के कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि भाजपा उन्हें सिर्फ रैलियों में भीड़ जुटाने तक सीमित रखती है। जब प्रधानमंत्री जैसे बड़े नेता आते हैं, तब वही गिने-चुने चेहरे आगे कर दिए जाते हैं।

गांव-गांव और गली-गली पार्टी का झंडा उठाकर संघर्ष करने वाला कार्यकर्ता आज खुद से सवाल कर रहा है—क्या उसकी मेहनत की कोई कीमत नहीं?

भाजपा मंचों से बार-बार यह दावा करती है कि “कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ हड्डी हैं”, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि वही रीढ़ हड्डी बार-बार तोड़ी जा रही है।

सम्मान कुर्सियों तक सीमित है और उपेक्षा मेहनतकश कार्यकर्ताओं के हिस्से में आ रही है।

आज जालंधर देहाती का हर छोटा कार्यकर्ता पूछ रहा है—अगर हमें आगे ही नहीं आने दिया जाएगा, तो हम लड़ेंगे किसके लिए?

अगर हमारी आवाज़ नहीं सुनी जाएगी, तो संगठन कैसे बचेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस पार्टी में कार्यकर्ता खुद को अपमानित महसूस कर रहा हो, वह 2027 में पंजाब में सरकार बनाने का सपना आखिर किस आधार पर देख रही है?

अब समय आ गया है कि भाजपा नेतृत्व फोटो पॉलिटिक्स से बाहर निकलकर ज़मीनी सिपाहियों को आगे लाए।

अन्यथा आने वाले समय में यही उपेक्षा पार्टी को भारी पड़ सकती है।

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