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कश्मीर का बदला जा सकता है नाम, गृह मंत्री ने दिया संकेत !

दिल्ली, 03 जनवरी (ब्यूरो) : केंद्र की एनडीए सरकार ने अपने कार्यकाल में कई शहरों के नाम बदले, अब सरकार एक राज्य का ही नाम बदलने की तैयारी कर रही है। इसका इशारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार दिया। उन्होंने ‘जेएंडके एंड लद्दाख थ्रू द एजेज’ किताब के विमोचन के अवसर पर कहा कि कश्मीर का नया नाम ऋषि कश्यप से जुड़ा हो सकता है। कश्मीर में भारत की संस्कृति की नींव पड़ी थी, और यहां सूफी, बौद्ध और शैल मठों ने बहुत अच्छा विकास किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि कश्मीर का नाम ऋषि कश्यप के नाम पर पड़ा होगा। शाह ने कहा कि शासकों को खुश करने के लिए लिखे इतिहास से छुटकारा पाने का समय है। उन्होंने आगे बताया कि अगर भारत को समझना है तो इस देश को जोड़ने वाले तथ्यों को समझना होगा। भारत का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है और निर्भरता के समय में कोशिश की गई कि हम इसे भुला दें। एक झूठ फैलाया गया कि यह देश कभी एकजुट नहीं हो सकता और लोगों ने इसे मान लिया था।

गृह मंत्री ने कहा कि हमारे देश का इतिहास हजारों साल पुराना है। हर कोने से दुनिया भर की सभ्यता को कुछ न कुछ देने के लिए कई गतिविधियां हुईं, लेकिन हमारी गुलामी के कालखंड में हमारा प्रजातीय आत्मविश्वास तोड़ने के क्रम में इसको विस्मृत कराने के कई प्रयास किए गए। एक झूठ फैलाया गया कि देश कभी एक था ही नहीं। देश की आजादी की कल्पना ही बेईमानी है, क्योंकि यह देश कभी था ही नहीं। ढेर सारे लोगों ने इस झूठ को स्वीकार कर लिया। जब इसके मूल में जाते हैं तो हमें मालूम पड़ता है कि अंग्रेजों के समय में लिखे गए इतिहास में कोई खराब इरादा नहीं होगा। लेकिन इनके अल्पज्ञान के कारण उनकी देश की व्याख्या ही गलत थी। एक प्रकार से देखे तो दुनिया भर के अधिकांश देशों का अस्तित्व जियो पॉलिटिकल अस्तित्व है। सीमाओं से बने हुए देश हैं, या तो किसी युद्ध से जन्मे हैं।

अमित शाह ने कहा कि कश्मीर का इतिहास अब इस पुस्तक के जरिए प्रमाणित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत का इतिहास और संस्कृति पूरे देश में फैली हुई है, और कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा, और इस पुस्तक में इसके ऐतिहासिक प्रमाण दिए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर में जो मंदिर पाए गए हैं, वे भारत और कश्मीर के बीच अटूट संबंधों को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास कभी भी लुटियन दिल्ली से नहीं लिखा जा सकता, उसे वास्तविकता को समझकर और प्रमाणों के आधार पर लिखा जाना चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्री ने धारा 370 और 35ए के बारे में भी बात की, जिसका उद्देश्य देश को बांटने और कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए था। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने इन धाराओं को हटाकर कश्मीर में विकास के रास्ते खोले हैं।

उन्होंने कहा कि इन धाराओं के कारण आतंकवाद पनपा था, लेकिन इनकी समाप्ति के बाद अब कश्मीर में शांति बढ़ी है।

कौन थे कश्यप, कश्मीर से क्या नाता

कश्मीर की संस्कृति और इतिहास पर केंद्रित इस पुस्तक के विमोचन के वक्त अमित शाह ने आखिर महर्षि कश्यप का नाम लिया। कश्मीर का इतिहास प्राचीन काल से ही मिलता है।

प्राचीन ग्रंथों में कश्मीर की संस्कृति और इसकी महिमा का विस्तार से जिक्र है। प्राचीन ग्रंथों के पन्ने पलटे तो पता चलता है कि कश्मीर को महर्षि कश्यप के नाम पर बसाया था। महर्षि कश्यप ने यहां तपस्या की थी। बाद में उनके ख्वाबों का राज्य बसा। कश्मीर घाटी में सबसे पहले कश्यप समाज का ही निवास था।

महाभारत काल में गणपतयार और खीर भवानी मंदिर का भी जिक्र है, यह आज भी कश्मीर में स्थित है। स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि कश्मीर भूमि में रुचि रखने वालों में यह आस्था का बड़ा केंद्र है।

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